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Jungal Me Mangal

कृष, विहान, नील, आरव और ईशान ने रूहानी और मायावी को फॉरेस्ट बस के सुरक्षित घेरे में ही बिठाया। इसके बाद वे पाँचों जंगल के भीतर अपने लिए एक गुप्त, छोटा सा ठिकाना बनाने के इरादे से बाहर निकल पड़े। बस से नीचे उतरते ही उन्होंने डिग्गी की तरफ रुख किया। वहाँ उन्होंने पहले से ही छिपाकर रखे गए लकड़ी काटने के भारी और धारदार हथियार निकाले—कुकरी, एक तेज़ आरी और एक भारी चापड़। इन खतरनाक हथियारों को हाथों में थामकर वे आगे बढ़ गए।

पाँचों दोस्त इन चमचमाते औजारों को लहराते हुए ब्लैक फॉरेस्ट के सबसे घने और दलदली रास्ते की तरफ़ बढ़ने लगे। दोपहर का समय था। सूरज की मद्धम किरणें ऊंचे पेड़ों के घने पत्तों से छनकर नीचे आ रही थीं, जिससे पूरे माहौल में एक अजीब और रहस्यमयी धुंधलका छाया हुआ था।

आरव ने अपने मज़बूत हाथों में भारी चापड़ की पकड़ को और कड़ा कर लिया था, वहीं दूसरी ओर कृष अपनी कुकरी की धार को धूप में चमकाते हुए चारों तरफ़ सतर्क निगाहें दौड़ा रहा था। जंगल का सन्नाटा उनके कदमों की आहट से टूट रहा था।

तभी कृष अचानक रुका और धीमे लेकिन गंभीर स्वर में बोला, "तुम तीनों उस तरफ जाओ, और मैं और विहान इस रास्ते पर आगे बढ़ते हैं। सूखी और मजबूत लकड़ियाँ तलाशो। अगर कोई भी अजीब बात दिखे या कोई गड़बड़ हो, तो तुरंत कॉल कर देना।"उसकी बात मानकर पाँचों दोस्त दो अलग-अलग दिशाओं में बंट गए और घने जंगल के सन्नाटे में विलीन हो गए।

कृष और विहान दोनों जंगल में आगे बढ़ रहे थे। तभी कृष की नज़र एक लंबे बाँस की लकड़ी पर पड़ती है। वह विहान से बोला, "तू आगे चल, मैं यहाँ से इसको काटता हूँ।"

विहान ने हाँ कहा और वह अकेला ही आगे बढ़ गया।विहान चलता हुआ एक पानी के झरने के पास पहुँच जाता है जहाँ पानी बह रहा था और आगे एक बड़ी नदी थी। नदी के बीच में एक बड़ा पत्थर था, जिस पर एक हट्टा-कट्टा पुरुष बैठा था। उसका शरीर बहुत मज़बूत था, उम्र करीब तीस साल थी, लंबे बाल थे और पूरे शरीर पर घने बाल थे। उसके बदन पर कोई कपड़ा नहीं था, उसने सिर्फ़ अपने पेनिस (लंड) और अस (ass) को पेड़ के पत्तों से ढका हुआ था। वह दिखने में एकदम टारजन की तरह लग रहा था।

वह टारजन पत्थर पर बैठकर मछलियों के साथ खेल रहा था और नदी के पानी से नहा रहा था। विहान उसको देखकर एकदम चौंक जाता है। वह धीरे-धीरे छुपता हुआ वहाँ पहुँचता है, अपना मोबाइल निकालता है और उसका वीडियो उतारने लगता है।

विहान मोबाइल पकड़कर पूरी एकाग्रता से वीडियो बना रहा था। तभी अचानक गीली मिट्टी पर उसका पैर फिसल गया और वह संतुलन खोकर धड़ाम से नीचे गिर पड़ा। सन्नाटे को चीरती हुई उसके गिरने की आवाज़ सीधे उस जंगली पुरुष (टारजन) के कानों तक पहुँच गई। टारजन ने तुरंत सतर्क होकर सिर घुमाया और उसकी पैनी नज़रें सीधे झाड़ियों के पीछे गिरे विहान पर टिक गईं। गुस्से में जानवरों जैसी भयंकर आवाज़ निकालते हुए, उसने पत्थर से सीधे पानी में छलांग लगाई और बड़ी फुर्ती से कूदता-फाँदता हुआ विहान की तरफ़ बढ़ने लगा।

उधर दूरी पर बाँस काट रहे कृष के कानों में भी विहान के गिरने और चीखने की आवाज़ पड़ी। वह अनहोनी की आशंका से सिहर उठा। हाथ में थामी कुकरी को कसकर पकड़े हुए वह बिना समय गंवाए उसी आवाज़ की दिशा में तेज़ी से भागने लगा।

टारजन कुछ ही पलों में अपनी अमानवीय रफ्तार की बदौलत विहान के बिलकुल करीब पहुँच चुका था। विहान डर के मारे थर-थर काँपते हुए लड़खड़ाते कदमों से किसी तरह खड़ा हुआ। सामने साक्षात खड़े उस विशालकाय, आदमखोर जैसे दिखने वाले शख्स को देखकर विहान की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई, उसका पूरा शरीर खौफ से काँप रहा था।

टारजन ने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी आधुनिक मनुष्य को देखा था। विहान के पहने हुए अजीब कपड़े, जूते और उसके हाथ में चमकती मोबाइल की स्क्रीन देखकर वह हैरान था। गुस्से और कौतूहल के मिले-जुले भावों के साथ, टारजन विहान के बिलकुल करीब आकर उसके चारों ओर धीरे-धीरे घूमने लगा और उसे ऊपर से नीचे तक बहुत गौर से देखने लगा।

टारजन विहान के बिलकुल सामने आकर खड़ा हो गया। वह कौतूहल और अचरज से भरा हुआ था। उसने अपना मज़बूत और खुरदरा हाथ आगे बढ़ाया और विहान के बदन पर फेरने लगा। वह कभी उसके कपड़ों को छूकर देखता, तो कभी उसके कंधों और बाजुओं पर अपना हाथ घुमाने लगता। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस जीव की त्वचा (skin) ऐसी क्यों है।

विहान डर के मारे बुरी तरह काँप रहा था। उसके गले से आवाज़ तक नहीं निकल रही थी। उसने किसी तरह अपनी पूरी हिम्मत जुटाई और काँपती हुई आवाज़ में डरते हुए बोला, "कौ... कौन हो तुम?"

लेकिन टारजन उसकी बात का कोई जवाब नहीं दे पाया क्योंकि उसे इंसानी भाषा का कोई ज्ञान नहीं था। विहान को बोलते देख उसका ध्यान विहान के चेहरे पर गया। विहान के मुँह से निकलती आवाज़ और हिलते होठों को देखकर वह हैरान था। उसने तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाया और विहान के होठों तथा उसकी जुबान पर अपनी उंगलियाँ फेरने लगा, मानो वह यह समझने की कोशिश कर रहा हो कि इस जीव के मुँह के अंदर से यह आवाज़ कैसे निकल रही है।

टारजन विहान का हाथ पकड़कर उसके बदन पर फेरता है, विहान डरके मारे उसके नेकेड बदन पर हाथ फेरना शरु कर देता है। जिसकी वजह से टारजन को अनकहा महसूस होता है।

टारजन विहान को इशारा करते हुए पानी दिखाता है ताकी वो भी उसके साथ नहाने जाए। टारजन विहान का हाथ पकड़कर पानी की तरफ खिंच कर ले जाता है।

विहान और टारजन पानी के अंदर उतर जाते है। पानी की वजह से विहान के कपडे भीगकर बदन पर चिपक जाते है, जिसकी वजह से उसका बदन टारजन को साफ-साफ दिखाई देता है।टारजन बिना सोचे विहान का शटॅ फाड़कर दूर फेंक देता है।

नदी का ठंडा पानी दोनों के सीने तक पहुँच रहा था। टारजन अपने शांत पड़े अंगों को देख रहा था और फिर विहान के शरीर की उस अनोखी गर्मी को महसूस करने की कोशिश कर रहा था। विहान की पैंट पानी में पूरी तरह भीग चुकी थी, और टारजन की उँगलियों का दबाव अब सीधे विहान की त्वचा पर महसूस हो रहा था।

पानी के बीच बढ़ती हलचलटारजन ने दोबारा अपना हाथ आगे बढ़ाया और इस बार विहान की पैंट के ऊपर से ही उसके कड़े होते औजार(लंड)को पूरी ताकत से भींच दिया।

विहान तड़पकर आँखें बंद करते हुए: "अह्ह्ह! शिट्... ओ गॉड... छोड़ो... प्लीज..."विहान के मुँह से निकली यह तेज सिसकी नदी के शोर में गूंज रही थी। टारजन ने चौंककर विहान के चेहरे को देखा। वह विहान के दर्द और इस अजीब से आनंद के बीच के अंतर को समझ नहीं पा रहा था। उसने अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की लेकिन हाथ वहीं रखा।

विहान हांफते हुए बोला: "तुम... तुम बहुत स्ट्रॉन्ग हो यार... उफ्फ... ऐसे मत पकड़ो... बहुत जोर से लग रहा है... आह!"

टारजन ने विहान के भीगे बदन को अपनी ओर खींचा। उसका चौड़ा, घने बालों वाला सीना विहान के नंगे बदन से टकराया। पानी की बूंदें उनके बीच पसीने की तरह चमक रही थीं। टारजन ने अपना दूसरा हाथ विहान की कमर पर टिका दिया और उसे ऊपर उठाने की कोशिश करने लगा।

टारजन गहरी और भारी आवाज में: "उंह्ह... उफ्फ... आह!"

विहान टारजन के मजबूत कंधों को पकड़ते हुए: "सुनो... रुको... डोंट डू दिस हियर... पानी बहुत गहरा है... ओह गॉड, तुम्हारी बॉडी कितनी हॉट है... उफ्फ..."।

𝐓𝐨 𝐁𝐞 𝐂𝐨𝐧𝐭𝐢𝐧𝐮𝐞𝐝... 𝑻𝒂𝒓𝒛𝒂𝒏, 𝒀𝒐𝒖𝒓 𝑭𝒖𝒄𝒌

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