टारजन ने अब विहान की पैंट की बेल्ट को अपनी मजबूत उँगलियों से खींचा। उसे समझ आ गया था कि इस कपड़े के अंदर ही वह जादुई गर्मी छुपी है। एक ही झटके में उसने विहान की भीगी पैंट को नीचे की तरफ सरका दिया। विहान का औजार अब पूरी तरह पानी के भीतर आज़ाद हो चुका था और टारजन के पैरों से छू रहा था।
विहान कांपती हुई आवाज में: "अह्ह... नहीं... रुक जाओ... तुम समझ क्यों नहीं रहे? ओफ्फ... यह गलत है... आह!"जैसे ही दोनों के नंगे अंग पानी के अंदर एक-दूसरे से रगड़े, टारजन के चेहरे के भाव बदलने लगे। उसे महसूस हुआ कि विहान के औजार की गर्मी अब उसके अपने शरीर में भी एक नई सनसनी पैदा कर रही थी। उसका अपना अंग, जो अब तक बिल्कुल शांत था, धीरे-धीरे कड़ा होने लगा था।


Write a comment ...