नदी के ठंडे पानी के बीच, उस बड़े पत्थर पर बैठा टारजन पूरी तरह से एक नए और अकल्पनीय अनुभव में डूब चुका था। जैसे ही विहान ने उसके विशाल औजार के ऊपरी हिस्से को अपने मुँह के भीतर लिया, टारजन का पूरा मजबूत शरीर एक झटके के साथ अकड़ गया।
मदहोशी और अनजानी सिसकियाँटारजन ने अपनी जिंदगी में कभी ऐसा अहसास नहीं किया था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि इस तीव्र सुख को क्या नाम दे। उसने अपने दोनों हाथों से पत्थर को इतनी जोर से भींचा कि उसकी उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए।


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