टारजन ने कौतूहलवश अपनी उंगली को उस हिस्से पर धीरे-धीरे फिराना शुरू किया। जब उसकी उंगलियों के पोरों ने विहान के उस बेहद कोमल, मखमली और गीले 𝙂𝙖𝙣𝙙 𝙆e 𝘾𝙝𝙝𝙚𝙙 को छुआ, तो उसे एक अलग ही बनावट का अहसास हुआ। विहान की उत्तेजित सांसें और पानी की लहरें मिलकर उस पल को और गहरे सस्पेंस में बदल रही थीं।
धीरे-धीरे उस मुलायम हिस्से को महसूस करते हुए, टारजन ने सहज जंगली प्रवृत्ति से अपनी उंगली के अग्रभाग को थोड़ा आगे बढ़ाया और बहुत ही धीरे से उसे विहान के तंग Ass hole के भीतर प्रवेश कराने लगा।


Write a comment ...